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परहुल देवी मन्दिर

रूरा-षिवली मार्ग से करीब 3 किलोमीटर दूरी पर ग्राम लमहरा की सरहद पर रिन्द नदी की तलहटी के बीच स्थित सैकडो वर्शो पुराना मां परहुल देवी का मन्दिर भक्तगणों के लिये आस्था का केन्द्र है। यहां समस्याग्रस्त व मन्नत मांगने वाले दर्षनार्थियों व भक्तगणों की मन्नत पूरी होने के बाद घंटा व चढ़ावा चढ़ाने का तांता लगा रहता है। मन्दिर को वर्शो से देखत आ रहे बुजुर्गो ने बताया कि उनके पूर्वज उन्हे यह बताते आ रहे है कि माता परहुल देवी का मन्दिर सैकड़ो वर्शो पुराना है। यहां तक कि आल्हा ऊदल का युद्ध भी इसी स्थान पर हुआ था। तब यहां कई किलो सोने का दिया (कुण्ड ) आल्हा ने मन्दिर में चढ़ाया था जिसे युद्ध के दौरान ऊदल ने मन्दिर से उठाकर रिन्द नदी की मध्य धारा में फेंक दिया था। मन्दिर के विशय में बुजुर्गो की मान्यता है कि मन्दिर में आज भी रात्रि के समय दिया जलता रहता है तथा प्रातःकाल देवी की मूर्ति पर ताजे सफेद व गुलाबी फूल चढ़े मिलते है। हाल मे ही भक्तगणों ने मन्दिर का जीर्णोद्धार व सुन्दरीकरण करा कर इसे नया स्वरूप प्रदान किया है।